इस सीज़न में एक नया खिलाड़ी है – "कानून"। लेकिन ये वो कानून नहीं जो किताबों में लिखा है। ये वो कानून है जो चार बजे सुबह बिना वारंट के दरवाज़ा तोड़ता है। ये वो कानून है जो मासूम को भी अपराधी बना देता है, क्योंकि उसके गाँव में फोन के तार नहीं बिछे, सिर्फ जाल बिछा है।
सिस्टम? तू मर गया, गुड्डू। तेरा सिस्टम भी मर गया। बच्चे अब कॉल सेंटर से पहले पिता को फोन करना सीख रहे हैं, कि कब पुलिस आएगी। यहाँ अब OTP नहीं, अंतिम संस्कार के टिकट बिकते हैं।
तो सुन लो, बाहर वालों। तुम्हारा पैसा वापस नहीं आएगा। तुम्हारा नंबर ब्लैकलिस्ट होगा। लेकिन हमारा... हमारा नंबर तो कभी था ही नहीं। हम बिना नंबर के पैदा हुए थे, और बिना नंबर के मरेंगे। बस हाँ... जब ये रिकॉर्डिंग बंद होगी... तब पता चलेगा कि आज किसका नंबर आया है।
Season two में... नंबर नहीं आता। नंबर आपको ले जाता है।
"सनी भाई, सिस्टम है। बिना सिस्टम के खेल नहीं जीतते।"
पिंजरे का गाना (Song of the Cage)
"जमताड़ा... सबका नंबर आएगा... सबका।"
यह प्रस्तुति जमताड़ा सीज़न 2 के विषयों – विश्वासघात, सत्ता की भूख, नतीजों का बोझ और एक पूरे गाँव का अपराध और पीड़ित दोनों होना – को दर्शाती है।
समाप्त।



